आज हम बात करेंगे अमेरिका की जानीमानी शख्सियत…तुलसी गबार्ड की …जिन्होंने पति की सेवा की ख़ातिर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से रिज़ाइन कर दिया है.
तुलसी गबार्ड ने इस्तीफे की वज़ह …पति के हड्डियों के कैंसर की दुर्लभ बीमारी को बताया है. वो बुरे वक्त में पति के साथ रहना चाहती हैं.
तुलसी गबार्ड ने कहा कि उनके पति अब्राहम का हाल ही में हड्डी के कैंसर की दुर्लभ बीमारी का पता चला है. आने वाले हफ्तों और महीनों में उनके सामने बहुत बड़ी चुनौतियां हैं… ऐसे पल में वो सार्वजनिक सेवा से अलग होकर हसबैंड की इस लड़ाई में पूरा सहयोग करना चाहती हैं.
45 साल की तुलसी गबार्ड … पैदायशी अमेरिकन हैं…वो चार बार सांसद रह चुकी हैं. वो अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक हैं.
बात अब भारत के साथ तुलसी के रिश्तों की… तुलसी गबार्ड का भारत से सीधा पारिवारिक रिलेशन नहीं है, हालांकि उनका हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव है.
उनकी मां हिंदू धर्म से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने सभी बच्चों को संस्कृत के नाम दिए.
तुलसी गबार्ड भी बचपन से ही भगवदगीता और वैष्णव परंपरा से प्रभावित रहीं. वे अमेरिकी कांग्रेस में चुनी जाने वाली पहली हिंदू-अमेरिकी महिला बनीं… और उन्होंने शपथ भी भगवदगीता पर ही ली थी.
भारत के साथ उनके रिश्ते राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर मज़बूत रहे. उन्होंने कई बार भारत का दौरा किया और भारत-अमेरिका संबंधों को मज़बूत करने की वकालत की.
साल 2014 में तुलसी ने पीएम मोदी को भगवदगीता भेंट की थी. वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के समर्थन में भी खुलकर सामने आई थीं.
कहते हैं कि वेस्टर्न कंट्री और अमेरिका जैसे देश में रिश्तों में व्यक्तिगत खुशी और स्वतंत्रता बहुत मायने रखती है.
यूएसए में हस्बैंड-वाइफ अधिकतर स्वतंत्र रूप से फैसले लेते हैं. वहां तलाक आम है. वहां लोग असंतुष्ट रिश्तों को ख़त्म करने में हिचकते कम हैं. अपने पर ज्यादा फोकस्ड रहते हैं.
ऐसे में तुलसी गबार्ड का पति अब्राहम की सेवा के लिए अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से इस्तीफ़ा देना बहुत बड़ी चीज़ है. काबिले तारीफ है.
ऐसे में कह सकते हैं तुलसी के इस फैसले के पीछे उनकी मां की परवरिश, उनकी खुद की सोच, और पति-पत्नी की आपसी समझ के साथ ही भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का बड़ा रोल रहा होगा.
