US Iran Peace: ईरान और अमेरिका के बीच जंग अभी रुकी हुई है…
लेकिन सच्चाई ये है कि आग अभी बुझी नहीं है
वैसे तो यूएस-ईरान में सीजफायर है,
लेकिन हक़ीकत में यह एक नाज़ुक दौर है ..जहां एक चिंगारी
फिर से पूरे मिडिल ईस्ट को तबाह कर सकती है
हालात ये हैं कि ईरान और अमेरिका
दोनों पीछे हटने को कतई तैयार नहीं,
बस, रणनीति बदल रहे हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
कहते हैं —
ईरान से डील करने का मुझ पर कोई दबाव नहीं है
लेकिन सवाल ये है—
अगर दबाव नहीं है,
तो बार-बार सफ़ाई क्यों?
वहीं ट्रंप ये भी कहते हैं कि ज़्यादातर मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बन चुकी है.
डील जल्द होगी. लेकिन ज़मीन पर तस्वीर दूसरी है.
दरअसल ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है
जब इस्लामाबाद में
अमेरिका-ईरान के बीच
दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी है.
और उसी समय
दो हफ्ते का युद्ध विराम
22 अप्रैल को खत्म हो रहा है
कुल मिलाकर कह सकते हैं कि टाइम कम है,
दांव बड़े हैं…और यहां भरोसा सबसे कमज़ोर कड़ी है.
अब जब ट्रंप नरमी दिखा रहे हैं,
तो ईरान अंगड़ाई ले रहा है. वह शर्तों के साथ समझौते की बात कर रहा है.
वहीं ट्रंप ने साफ़ कर दिया है कि जब तक डील नहीं होती,
होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर
अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड जारी रहेगा.
यानी बातचीत की टेबल पर हाथ मिलाने की बात तो होगी, मगर टेबल के नीचे
ट्रिगर पर उंगली रहेगी.
तो बड़ा सवाल—
क्या ईरान की ज़िद
ट्रंप की हेकड़ी पर भारी पड़ेगी?
वहीं ट्रंप अब युद्ध की भाषा नहीं बोल रहे हैं. वो सीधी बातचीत का ऑफर दे रहे हैं.
यहां तक कह रहे हैं कि तो वे ईरानी नेतृत्व से
आमने-सामने मिलने को भी तैयार हैं.
बताया जा रहा है कि
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस,
विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
और जेरेड कुशनर वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं.
वहीं तेहरान साफ़ कह रहा है कि
अमेरिका भरोसे के काबिल नहीं. फिर भी वो शांति वार्ता को लेकर पूरी तरह से निगेटिव नहीं है.
उधर ट्रंप साहेब साफ़ कहते हैं—
ईरान के पास अब
परमाणु हथियार नहीं होगा.
तो तस्वीर बिल्कुल साफ़ है—
एक तरफ़ बातचीत के दरवाज़े खुले हैं,
दूसरी तरफ़ जंगी जहाज़ तैनात हैं.
अब सबकी निगाह
22 अप्रैल पर है
या तो यह टकराव
कूटनीति में बदलेगा…
या फिर
मिडिल ईस्ट
एक बार फिर
युद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा.
