आज हम बात करेंगे आप के टूट की, पंजाब की. केजरीवाल की और बीजेपी के ऑपरेशन लोटस की.
24 अप्रैल 2026 आम आदमी पार्टी के लिए एक मनहूस दिन साबित हुआ. उसके दो तिहाई राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर ..भाजपा का दामन थाम लिया.
ये सभी सांसद पंजाब से थे. पंजाब में अगले साल विधानसभा का चुनाव है. अभी यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है.
वहीं बीजेपी की नज़र चुनाव से पहले ही पंजाब में अपनी या किसी और की सरकार बनवा देना है.
चुनावी एक्सपर्ट कह रहे हैं कि ये ऑपरेशन लोटस का पहला चरण है. जिनमें आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर कमज़ोर कर दिया गया है. वहीं पंजाब में उसको तगड़ा झटका दिया गया. इस तरह से देखें तो बीजेपी अपने दोनों मोर्चों पर कामयाब रही है.
बता दें कि राज्यसभा में आप के कुल जमा 10 सांसद थे. इनमें से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वॉइन कर ली. दिग्गज नेता राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ते वक्त आम आदमी पार्टी पर सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया है. इतना ही नहीं राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि वह “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” थे.
वहीं राज्यसभा में राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह सहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए.
उधर आप नेता संजय सिंह ने बीजेपी में शामिल होने वाले इन नेताओं को ‘गद्दार’ बताया है. साथ ही ये कहा है कि पंजाब की जनता उन्हें माफ़ नहीं करेगी.
वहीं गौर से देखें तो आज सवाल आम आदमी पार्टी की टूट का नहीं,
आज सवाल ये है कि क्या इस टूट की स्क्रिप्ट बीजेपी ने लिखी—
या कलम खुद AAP के हाथ में थी ?
7 सांसद बीजेपी में चले गए…ये तो राजनीति का सबसे पुराना खेल है.
वैसे बीजेपी पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वो साम-दाम-दंड-भेद करके विपक्ष को कमज़ोर करने में लगी रहती है.
लेकिन बड़ा सवाल ये भी है—
अगर पार्टी के भीतर सांसदों की सुनी जाती, तो क्या राघव चड्ढा जैसे नेता आम आदमी पार्टी छोड़ते. शायद नहीं.
एक बड़ा सवाल आखिर बीजेपी को AAP के राज्यसभा सांसदों की ज़रूरत क्यों पड़ी? इसका सीधा ज़वाब है,
ये सिर्फ़ संख्या का नहीं, रणनीति, नैरेटिव और भविष्य की राजनीति का है. अगले साल पंजाब में असेंबली चुनाव है. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष महाभियोग ला रहा है. उससे बचने की बीजेपी की तैयारी है.
