आज हम एक ऐसे विषय पर बात कर रहे हैं, जिसकी आजकल बहुत चर्चा हो रही है…वो है …जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी।
अब इसे समझते हैं…
कुछ लोगों में जन्म के समय मिला जेंडर और उनकी अंदरूनी पहचान …आपस में मेल नहीं खाते। यानी बड़े होने पर लड़के और लड़की में विपरीत लक्षण महसूस होते हैं…ये स्थिति जेंडर डिस्फोरिया कहलाती है…
इससे निजात पाने के लिए जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी करानी पड़ती है…साथ ही कई तरह की जांच के साथ ही हार्मोन थेरेपी भी करवानी पड़ती है…
ये बात आखिर चर्चा में है क्यों …
अभी हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की बेटी अनाया बांगर ने खुलासा किया है कि उन्होंने थाईलैंड में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी करवाई है।
बता दें कि अनाया को जन्म के समय लड़का माना गया था और उनक नाम था आर्यन.
मगर आज वो जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी कराकर लड़के से लड़की बन गईं…अब उनका नाम आर्यन बांगर नहीं अनाया बांगर है…सर्जरी के बाद वो बेहश खुश हैं..
अब इससे जुड़ी कुछ ख़ास बातें…
पहली बात.. जेंडर अफर्मिंग सर्जरी होती क्या है…
जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी कोई फैशन या कॉस्मेटिक ट्रेंड नहीं है। यह एक मेडिकल ट्रीटमेंट ऑप्शन है, जिसका मक़सद व्यक्ति के शरीर को उसकी जेंडर पहचान के हिसाब से बनाना होता है। इसमें अपर सर्जरी… छाती, बॉटम सर्जरी जननांग या फेसियल सर्जरी.. चेहरे से जुड़ी सर्जरी शामिल हो सकती हैं…
दूसरी बात …जेंडर डिस्फोरिया होता क्या है…
जन्म के समय बेबी… लड़का है या लड़की… उसकी शारीरिक संरचना के हिसाब से मान लिया जाता है…हालांकि उनके शरीर की अंदरूनी बनावट और फिजिकल अपीरियंस वैसा नहीं होता है.
लेकिन बढ़ती उम्र के साथ ये बदलाव गहरा होता जाता है…जेंडर डिस्फोरिया के शिकार लड़कों की फीलिंग लड़की जैसी होने लगती है …और लड़कियों में लड़कों जैसा बदलाव महसूस होने लगता है…
इस वज़ह से इस तनाव से गुज़र रहे लड़के-लड़कियों को काफी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ता है… इसी हालात को ही जेंडर डिस्फोरिया कहा जाता है. इन बदलावों की वज़ह से उन्हें लगातार मानसिक तनाव हो सकता है. वो गहरे डिप्रेशन में जा सकते हैं…
तीसरी बात जेंडर डिस्फोरिया से परेशान लोगों को कई तरह की जांचें और हार्मोन थेरेपी भी करानी पड़ती है…
