आज बात महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में फेल होने की करते हैं.
देश की आधी आबादी को उसका हक़ मिलना चाहिए…इतनी छोटी-सी बात अपोजिशन को समझ में क्यों नहीं आई…
और महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में दो दिन की चर्चा के बाद ये बिल पास नहीं हुआ. हालांकि इस बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े. वहीं विपक्ष के खाते में 230 वोट पड़े. वज़ह साफ थी कि सरकार के पास बिल को पास कराने वाला दो तिहाई बहुमत नहीं था. और विपक्ष कमोवेश एकजुट रहा.
इस तरह से महिला आरक्षण बिल के के साथ नत्थी किए गए संघ राज्य क्षेत्र विधि संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 भी गिर गए.
आखिर ऐसा हुआ क्यों, उसको समझते हैं. इस संशोधन विधेयक के पास न होने के पीछे महिला आरक्षण नहीं …बल्कि लोकसभा की सीटों का परिसीमन है.
विपक्ष को लोकसभा की सीटों का ये परिसीमन बिल किसी भी सूरत में मंजूर नहीं हैं. विपक्ष इसे बीजेपी की गहरी चाल बता रहा है. विपक्ष का आरोप है, बीजेपी ने महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक फायदे के लिए असेंबली चुनावों के बीच उठाया है.
हालांकि लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़ों के ज़रिए ये समझाने की कोशिश की थी कि परिसीमन से दक्षिण के पांचों राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा.
अमित शाह ने तब कहा थि यह एक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि 3 बिलों से दक्षिण के राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं है.
भले ही संसद में महिला आरक्षण बिल पास न सका हो, बीजेपी अपनी हार को जीत में बदलने के लिए 23 और 29 अप्रैल को होने वाले तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के ने चुनावों में जनता के बीच जाएगी और विपक्ष को सड़क पर घेरेगी.
बीजेपी यहां जनता के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि विपक्ष महिला विरोधी है और उन्होंने इस ऐतिहासिक सुधार को रोक दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बिल को लेकर देश की महिलाओं से खास अपील की थी. वहीं अमित शाह ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण की विरोधी है.
बता दें कि महिला आरक्षण को लेकर संशोधन बिलों पर वोटिंग से पहले सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर महिला आरक्षण कानून, 2023 लागू कर दिया है. ऐसे में पूरी तरह से सीन क्लियर है कि बीजेपी महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर खामोश नहीं रहेगी. जैसे ही जातीय गणना के साथ 2027 में जनगणना पूरी होगी. वो जोरशोर से इसको लेकर सड़कों पर उतरेगी. विपक्ष को घेरेगी. और 2029 के लोकसभा के आम चुनाव का एजेंडा तय कर देगी.
वहीं विपक्ष कह रहा है कि लोकसभा में फेल हुआ ये बिल महिला आरक्षण बिल नहीं है. महिला आरक्षण बिल तो 2023 में पारित हो चुका. ये बिल तो देश का चुनावी नक्शा बदलने की साज़िश है…और ये सच है कि वोटिंग से पहले ही सरकार ने महिला आरक्षण बिल 2023 को पास करने वाला नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.
