कोविड (Covid) के बाद पहली बाद दुनिया फिर एक गहरे संकट से गुजर रही है. लोगों को डर सता रहा है ‘LOCKDOWN’, का…
लोग पैनिक हो रहे हैं…घरों में तनाव बढ़ गया है…फरमाइश वाली चीजें कम बन रही हैं…घरेलू गैस का संकट हर जगह दिख रहा है…सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं…इन कतारों में लगे कुछ लोग बेहोश होकर गिर रहे हैं…कुछ के तो परिवार भी उजड़ गए हैं.
कॉमर्शियल गैस के संकट से बाज़ार में चाट-कचौड़ी से लेकर रेस्टोरेंट और होटलों में खाना महंगा हो गया है …वेराइटी भी कम हो गई है…जगह-जगह कम पैसों में चलने वाली कैंटीनों और फ्री के लंगर और भंडारों पर इसका पूरा असर दिख रहा है…कैंटीनों में रोटी पर पूर्ण विराम तक लग गया है…
तेल संकट गहरा रहा है…कोरोना काल का लॉकडाउन सबको डरा रहा है…
ईरान वॉर ने तेल की कीमतों पर काफी असर डाला है…कच्चा तेल $112 प्रति बैरल तक पहुंच रहा हैं.
दुनिया भर में एयरलाइनें उड़ानें कट रही हैं…
ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है…
दुनिया भर की सरकारें इन चुनौतियों को “एनर्जी सिक्योरिटी” कह रही हैं… दक्षिण कोरिया, जापान, और बांग्लादेश जैसे देशों में फ्यूल राशनिंग शुरू हो चुकी है… लॉकडाउन आया नहीं है, पर वैसा ही दिखना शुरू हो चुका है…
बांग्लादेश, फिलीपींस और श्रीलंका में पेट्रोल के लिए लंबी कतारें चल रही हैं… पाकिस्तान में पेट्रोल-डीज़ल सब महंगा हो गया है…
अब सरकारें भी लोगों को सचेत कर रही हैं. लोगों से कह रही हैं कि बिना जरूरी वज़ह के घरों से बाहर न निकलें.
इस बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, IEA ने “Sheltering from Oil Shocks” यानी… तेल के झटकों से बचाव… के लिए दुनिया भर के देशों के लिए 10-पॉइंट का प्लान जारी किया है.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने सुझाव दिया है कि वाहनों के लिए लाइसेंस प्लेट के आधार पर ऑ-ड-ईवन का नियम सरकारें लागू करें,
जहां तक संभव हो हवाई यात्रा कम करें,
ऑफिस नहीं घर से काम करने को बढ़ावा दें. यानी कि कोविड-काल के दौरान अपनाए गए “वर्क-फ्रॉम-होम” मोड में काम शुरू करें…
अब समझते हैं कि क्या सरकारें लॉकडाउन लागू करेंगी…तो मेरा साफ कहना है कि सरकारें ऐसा कतई नहीं करेंगी…बल्कि “ऊर्जा सुरक्षा उपाय” का लेवल लगाकर इसे पेश करेंगी, लेकिन इसका असर वही होगा….जैसा लॉकडाउन में हुआ था…
लोगों को सीमित रूप से बाहर आने-जाने की अनुमति मिलेगी…एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए ज़रूरी कारण बताने होंगे… इतना ही नहीं बहुत से क्षेत्रों में पाबंदियाँ लागू हो सकती हैं…
अब सोचिए कि भारत क्या कर रहा है…
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर देश के मुखिया भी परेशान हैं.
इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी …लोकसभा को ये बता चुके हैं, कि पश्चिम एशिया युद्ध का प्रभाव …लंबे समय तक रह सकता है.
मोदी ने राज्यसभा में भी ये कहा कि इस युद्ध ने विश्व भर में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है.
अब सोच लीजिए …पीएम मोदी, जब संसद में इस समस्या का जिक्र कर रहे हैं…इसका मतलब है कि भारत के लिए इसका ड्रॉफ्ट बन चुका है…तैयार रहिए…बस पैनिक न होइए…जब वो दौर गुज़र गया…तो ये निकल जाएगा.
