Dollar Vs Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है…
सवाल उठ रहा है—
क्या भारतीय रिज़र्व बैंक सो रहा है?
क्या भारत सरकार हाथ पर हाथ रखे बैठी है?
या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी रणनीति है?”
“सबसे पहले एक ज़रूरी तथ्य समझिए—
भारतीय रिज़र्व बैंक का काम रुपये का कोई तय लेवल बचाना नहीं है।
RBI का एक ही टार्गेट है—
रुपये में अचानक गिरावट रोकना,
न कि बाज़ार के हर उतार-चढ़ाव में कूद पड़ना.
“यानी अगर रुपया धीरे-धीरे कमज़ोर होता है,
तो भारतीय किज़र्व बैंक चुपचाप उसे स्वीकार करता है।
लेकिन अगर गिरावट अचानक और तेज़ हो जाए…
तभी RBI बाज़ार में आ धमकेगा…रुपए को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा यानी की डॉलर को बाज़ार में लगा देगा…
लेकिन बड़ा सवाल …RBI के पास तो विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर हैं…
फिर रोज़ डॉलर बेचकर रुपये को क्यों नहीं बचा रहा?
इसको भी समझते हैं …“क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार …कोई रोज़मर्रा का खर्च नहीं, बल्कि आपातकालीन हथियार है…
अगर RBI रोज़ डॉलर बेचेगा…
तो विदेशी मुद्रा का भंडार तेज़ी से घटेगा…
और बाज़ार में डर का एक बड़ा मैसेज जाएगा…कि भारत अब रुपए को बचाने में जुटा है…
इस तरह से पूरी सीन पर गौर करें तो
“रुपये पर दबाव सिर्फ भारत की वज़ह से नहीं है…
बल्कि इसके कई कारण गिनाता हूं…
इसके पीछे पश्चिम एशिया में तनाव एक बड़ा कारण है…
कच्चा तेल महंगा होना दूसरी बड़ी वज़ह है…
और मज़बूत डॉलर रुपए को उठने नहीं दे रहा है…यह
एक बड़ा रीज़न है
इस तरह से इन कारणों से भारतीय रुपया लुढ़क रहा है…
ये सभी वज़हें रुपये को नीचे खींच रही हैं”
सवाल उठता है कि भारत सरकार चुप क्यों है…आख़िर कुछ कर क्यों नहीं रही है…
इसकी हक़ीक़त भी दिख रही है…भारत सरकार भी बहुत तगड़ा रुपया नहीं चाहती है…वह कमज़ोर रुपया देखकर मुस्कुरा रही है…
क्योंकि…. जब रुपया कमज़ोर रहेगा तो
भारतीय निर्यात सस्ता रहेगा…विदेशी भारतीय सामान को सस्ता समझेंगे…और माल यहां से विदेशों को जाएगा…
भारत से आईटी, फॉर्मा और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर सामान निर्यात करने के कंपटीशन में रहेंगे…
इस तरह से देखें तो …भारत सरकार और RBI दोनों चाहते हैं कि
बाज़ार की ताकतें ही रुपए की औकात तय करें…उसे दखल न देना पड़ा…
इससे दुनिया को ये संदेश जाए…
कि भारत …अपनी मुद्रा रुपया से छेड़छाड़ नहीं करता…यानी वहां कोई घबराहट नहीं है
कुल मिलाकर सीन साफ़ है…
RBI कतई लापरवाह नहीं है…
और सरकार बेफिक्र और बेपरवाह नहीं है…
इंडिया की रणनीति …शीशे की तरह साफ़ दिख रही है…
कि रुपये को गिरने से रोकना नहीं है,..
बल्कि उसे बेकाबू होने से रोकना है…
क्रैश होने पर ही हाथ लगाना है…
“और यही वज़ह है कि रुपए की लगातार गिर रही क़ीमतों के बावज़ूद
शांति दिख रही है …भारत में पैनिक नहीं है…
आरबीआई और सरकार को ये अंदाज़ा है कि रुपए की कीमत क्या है …उस पर बाज़ की तरह सरकार की नज़र टिकी है…
सरकार और आरबीआई को ये भी पता है कि विदेशी मुद्रा ख़ासकर डॉलर की ताक़त क्या है…
ऐसे में भारत सरकार और आरबीआई रुपए की गिरती साख से निर्यात में बड़े ग्रोथ का सपना देख रही है. उसकी गिरती क़ीमतों से वो डर नहीं रही है.
अब बात रुपए और डॉलर की करते हैं…
मार्च 2023 में 83.3 रुपए का 1 USD मिलता था…
वहीं मार्च 2026 में लगभग ₹94 में 1 USD मिल रहा है.
राउंड फीगर की बात करें तो तीन सालों में डॉलर के मुक़ाबले में 11 रुपया गिर चुका है. इस तरह से देखा जाए तो तीन साल बाद रुपए का अवमूल्यन 13 फीसदी से ज्यादा हो चुका है…
बीते 2025 में डॉलर के मुक़ाबले में वार्षिक गिरावट 4.7% फीसदी तक रही है…ध्यान रहे यह गिरावट निरंतर वैश्विक दबावों, तेल की कीमतों, और वैश्विक बाज़ार के माहौल के कारण रही है.
