Lok Sabha Seats: बात करेंगे लोकसभा में महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन की …
परिसीमन को लेकर राजनीति गरम है.
दक्षिण बनाम उत्तर भारत चल रहा है
आरोप है कि दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव हो रहा है
लेकिन गृह मंत्री अमित शाह का दावा है कि डीलिमिटेशन के बाद दक्षिण भारत की ताकत घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी.”
वहीं “विपक्ष सवाल उठा रहा है—
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा है कि अभी लोकसभा की 543 सीटों में दक्षिण के 5 राज्यों की भागीदारी 129 सांसदों की है, जो लगभग 24 फीसदी है. डीलिमिटेशन के बाद सीटों की संख्या 816 हो जाएगी. इनमें से दक्षिण भारतीय राज्यों के सांसदों की संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी. तब भी उनकी भागीदारी लगभग 24 प्रतिशत ही रहेगी.
इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में साफतौर पर कहा है कि नए सदन में सांसदों की कुल संख्या 850 नहीं 816 होगी.
अब अमित शाह के दावे को आसान भाषा में समझते हैं.
अभी देश में लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं.
कर्नाटक में 28 सांसद हैं. संविधान संशोधन के बाद ये संख्या बढ़कर 42 हो जाएगी.
आंध्र प्रदेश में 25 सीटें हैं, ये संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी.
तेलंगाना में 17 सीटें, 26 हो जाएगी.
तमिलनाडु में 39 सांसद की बज़ाय 59 सांसद हो जाएंगे.
केरल में अभी 20 सीटें हैं, परिसीमन के बाद ये 30 हो जाएंगी.
गृहमंत्री ने संसद को आश्वस्त किया है कि किसी भी दक्षिणी राज्य की शक्ति घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी.
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये बिल संसद में पास हो पाएगा…क्या एनडीए अपने बूते पर इसे पारित करा पाएगा. वज़ह साफ़ है इस बिल को पास कराने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत चाहिए. इसके लिए 360 सांसद चाहिए… अभी एनडीए के पास कुल जमा 293 सांसद हैं. ऐसे में मोदी-शाह की जोड़ी बाकी 67 और सांसदों का इंतज़ाम कैसे करेगी. यह एक यक्ष प्रश्न है.
लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है…अभी तो विपक्ष एकजुट दिख रहा है. हो सकता है कि वोटिंग के पहले उसका हृदय परिवर्तन हो जाए. बिल के पक्ष में ही वोट दें या वोटिंग से पहले ही पूरा अपोजिशन या उसका एक बड़ा हिस्सा सदन से वॉकआउट कर जाए…. और बड़ी आसानी से ये बिल पार्लियामेंट में पास हो जाए.
ऐसे में बड़ा सवाल ये नहीं कि लोकसभा में सीटें बढ़ेंगी या घटेंगी…
सवाल ये है— सरकार कैसे दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटाएगी ? आप भी सोचिएगा…
