Sunday, August 2, 2026
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Taslima Nasrin को 19 साल बाद मिला भारत का साथ ! जानें सीएम सुवेंदु ने क्या कहा

तसलीमा नसरीन (Taslima Nasrin) को मिली इंडिया की सुरक्षा की गारंटी ! बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका हैं तसलीमा ! कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ चेहरा हैं नसरीन ! CM सुवेंदु अधिकारी का तसलीमा को भरोसा !

न…आज बात करेंगे धार्मिक कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ आग उगलने वाली लेखिका की…बांग्लादेश छोड़कर निर्वासन में रह रहीं तस्लीमा नसरीन की…और आज के बदले हुए भारत में उनके वेलकम की…

धार्मिक कट्टरपंथ की नाक में दम करने वाली और महिलाओं के हक़ की वकालत करने वाली नामचीन हस्ती तसलीमा नसरीन दुनिया भर में जान बचाती फिर रही हैं. ऐसे में 19 साल बाद उनकी इंडिया में एंट्री हुई है. कोलकाता में उनका शानदार वेलकम हुआ है. 

अब पश्चिम बंगाल की सरकार ने उन्हें सुरक्षा का वचन दिया है. CM सुवेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन को भरोसा दिलाया कि पूरा बंगाल उनकी सुरक्षा करेगा. 

19 साल बाद तसलीमा कोलकाता लौटी हैं. अब सीएम अधिकारी ने कहा है कि वो जितनी बार चाहें, बंगाल आ सकती हैं. सरकार हर तरह की सुरक्षा देगी.

इस दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धमकी और डराने-धमकाने के दिन अब लद चुके हैं. 

साल 2007 में अपने लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद तस्लीमा नसरीन को कोलकाता के साथ हिंदुस्तान भी छोड़ना पड़ा था.

इससे पहले तस्लीमा को 1994 में अपनी लेखनी को लेकर इस्लामी समूहों से मिली जानलेवा धमकियों के बाद बांग्लादेश से भागना पड़ा था. उनके खिलाफ कई फतवे जारी हुए थे.

बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन 2004 से 2007 तक कोलकाता में रही थीं. उस समय की वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें शहर छोड़ने के लिए कहा था, तब उनकी आत्मकथा द्विखंडितो के कुछ हिस्सों को लेकर राज्य भर में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे.

‘द्विखंडितो’ यानी Split: A Life बांग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन की बहुचर्चित आत्मकथा का तीसरा खंड है, जो साल 2003 में प्रकाशित हुई थी. यह पुस्तक अपने कट्टरपंथ-विरोधी विचारों, 

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोपों और सामाजिक विवादों के कारण बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में प्रतिबंध का सामना कर चुकी है.

साल 2007 में कोलकाता से बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को जबरन बाहर भेजे जाने की घटना बंगाल की राजनीति में लंबे समय से विवाद का विषय रही है. 

अब राज्य में सरकार बीजेपी की है. और नसरीन की वापसी का एक राजनीतिक महत्व है. 

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