Mahila Aarakshan: आज हम चर्चा करेंगे महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन पर
“आज की ये चर्चा ..सिर्फ़ महिलाओं के आरक्षण की नहीं है,
ये चर्चा है सत्ता के संतुलन की,
संसद के नक़्शे की…और
2029 के भारत की राजनीति की दिशा की”
ये सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि सरकार संसद में महिला आरक्षण कानून और परिसीमन संबंधी विधेयक ला रही है..
अब जानते हैं कि इससे क्या बदलाव आ सकता है.
वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव है, ताकि महिला आरक्षण कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सके.और महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें रिज़र्व की सकें.
इसके लिए सरकार 3 विधेयक संसद में पेश करने जा रही है. अगर इन पर मुहर लग जाती है, तो लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 तक पहुंच जाएंगी.
इसके लिए सरकार जो तीन विधेयक लाने जा रही है उनमें संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक, और केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं.
माना जा रहा है कि उत्तर भारत के राज्यों में नई सीटों की संख्या में ख़ास इज़ाफ़ा देखने को मिल सकता है यूपी की ही बात करें तो .
80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की ये संख्या बढ़कर 125 हो सकती है.
वहीं, बिहार में लोकसभा की सीटें 40 से बढ़कर 62 तक पहुंच सकती है.
महाराष्ट्र में 48 एमपी सीट से बढ़कर 75 हो सकती हैं.
वहीं तमिलनाडु में लोकसभा सीटों की ये संख्या मौज़ूदा 39 से बढ़कर 61 हो सकती है.
उदाहरण के तौर पर देखें तो इस बदलाव से यूपी और तमिलनाडु में सीटें बढ़ने का प्रतिशत तो एक ही होगा, लेकिन संख्या बदल जाएगी. एक ओर जहां यूपी में 45 नई सीटें जुड़ेंगी. वहीं, तमिलनाडु के खाते में केवल 22 आएंगी.
वहीं इन विधेयकों को लेकर “सरकार मज़बूती से कहती है कि महिला सशक्तिकरण के लिए ये कदम बेहद ज़रूरी है.
अब लोकसभा सीटों में होने वाले अंतर को लेकर विपक्ष ख़ासकर दक्षिणी राज्य चिंता जता रहा है. उनका कहना है कि इससे राजनीतिक ताक़त का केंद्र
दक्षिण से उत्तर की ओर खिसक सकता है.
ऐसे में सवाल उठता है कि जनसंख्या नियंत्रण की क़ीमत क्या दक्षिणी राज्यों को संसद में कम आवाज़ के रूप में चुकानी पड़ेगी?
सवाल ये है—
क्या 2029 के बाद बनने वाली संसद
सिर्फ़ ज़्यादा प्रतिनिधित्व वाली होगी
या ज़्यादा राजनीतिक टकराव वाली भी?
