Monday, November 2, 2026
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US MIDTERM POLL 3 नवंबर को, जानें डिटेल

आज बात करेंगे 3नवंबर को अमेरिका में होने वाले मिड टर्म चुनाव की…प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और भारत पर पड़ने वाले असर की…

क्या आपको पता है कि यूएस में मध्यवधि चुनाव का मतलब क्या है…अगर है तो वीडियो स्किप कर सकते हैं..अगर जानना चाहते हैं तो पूरा वीडियो सुनिए.

अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव यानी की मध्यावधि चुनाव वे चुनाव होते हैं… जो राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में यानी दो साल पूरे होने पर कराए जाते हैं.

इन चुनावों में सीधे तौर पर राष्ट्रपति पद के लिए वोट नहीं पड़ते हैं. लेकिन इसे राष्ट्रपति के अब तक के कामकाज पर जनता का रेफरेंडम यानी जनमत-संग्रह माना जाता है.

अमेरिका की संसद को ‘कांग्रेस’ कहते हैं, जिसके दोनों सदनों…निचले सदन, हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स और उच्च सदन, सीनेट के लिए ये चुनाव होते हैं:

इस मिडटर्म चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी की निचले सदन की सभी 435 सीटों पर चुनाव होते हैं. इस सदन से सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का होता है.

वहीं,.. सीनेट यानी की उच्च सदन की एक तिहाई सीटों यानी 100 सीटों में से 33 या 35 सीटों पर इलेक्शन होते हैं. सीनेट यानी उच्च सदन के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है.

इन संघीय चुनावों के साथ-साथ कई राज्यों में गवर्नर, स्थानीय निकाय और राज्य की विधानसभाओं के चुनाव भी कराए जाते हैं.

अब इस मिड टर्म चुनाव से क्या असर पड़ने वाला है, उसे समझिए…
इन चुनावों के नतीजों से यह तय होगा है कि संसद के दोनों सदनों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी का बहुमत रहेगा या विपक्षी पार्टी का.

यदि विपक्षी पार्टी संसद पर कब्ज़ा कर लेती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने मनमुताबिक नए कानून पास कराना मुश्कल होगा. और अपनी नीतियां लागू कराना और कठिन हो जाएगा.

अब समझते हैं कि अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन का अमेरिकी राजनीति, डोनाल्ड ट्रंप और भारत पर क्या असर पड़ेगा.

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग होनी है. इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की ताक़त की अग्नि परीक्षा होगी.

अगर रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत गंवा देती है, तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है.

वहीं भारत की नज़रें भी इन चुनावों पर टिकी हुई है. चुनाव नतीजों का असर टैरिफ़, H-1B वीज़ा, रूस से तेल ख़रीदने और पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती नज़दीकी जैसे मुद्दों पर पड़ सकता है?

अगर जानकारी सही लगी हो तो …कमेंट, शेयर और लाइक करना मत भूलिएगा.

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