मैकमोहन रेखा को ही नहीं मानता चीन: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, ‘चीनी लोग… अरुणाचल से लगी मैकमोहन रेखा को नहीं मानते, इसलिए कभी-कभी ऐसा हो जाता है…कि वो भारतीय सीमा में घुस आते हैं.
न…आज बात करेंगे अरुणाचल में चीन की घुसपैठ की… मैकमोहन लाइन की…और इस पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के बड़े खुलासे की…
ड्रैगन यानी की चीन … भारत-चीन सीमा के बीच की मैकमोहन रेखा को मानता ही नहीं…ये बात कही है हमारे एक सीएम ने…
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, ‘चीनी लोग… अरुणाचल से लगी मैकमोहन रेखा को नहीं मानते, इसलिए कभी-कभी ऐसा हो जाता है…कि वो भारतीय सीमा में घुस आते हैं.
खांडू ने कहा कि अरुणाचल की तिब्बत-चीन के साथ बहुत लंबी सीमा लगती है, जो लगभग 1,200 किलोमीटर है।’ उन्होंने कहा कि इसलिए उनकी तरफ से गश्ती दल कभी-कभी ‘हमारी तरफ आ जाते हैं’ और यह ‘सीमा का उल्लंघन है, घुसपैठ नहीं.’
खांडू ने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं कि उल्लंघन हुआ है। लेकिन ऐसा होता रहता है; यह कोई नई बात नहीं है। चूंकि, सीमा पर कोई स्पष्ट रेखा नहीं है, इसलिए सीमा तय नहीं है।’
पिछले हफ्ते, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा के पास कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ टकराव की घटनाएं हो रही हैं, जिससे विवाद पैदा हो गया।
इसी टिप्पणी के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति समय-समय पर बिगड़ जाती है, जब चीनी सेना स्थापित गश्ती पैटर्न से हट जाती है।
इस पर उनके चीनी समकक्ष ने गुओ ने कहा था, ’चीन दोनों देशों के बीच हुए प्रासंगिक समझौतों, और बनी आपसी सहमति का सख्ती से पालन करता है। सीमावर्ती इलाकों में अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य सीमा गश्त करता है और नियंत्रण गतिविधियां करता है।’
अब समझिए मैकमोहन लाइन के बारे में…
मैकमोहन रेखा भारत के अरुणाचल प्रदेश और चीन के तिब्बत क्षेत्र के बीच की सीमा रेखा है।
1914 में हुए शिमला समझौते (Simla Convention) के दौरान ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मैकमोहन द्वारा यह रेखा निर्धारित की गई थी, जिनके नाम पर इसे मैकमोहन रेखा कहा जाता है।
यह लगभग 890 किलोमीटर लंबी है, जो पश्चिम में भूटान से लेकर पूर्व में म्यांमार (बर्मा) की सीमा तक फैली हुई है।
भारत इसे एक वैध, कानूनी और आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है।
वहीं चीन इस रेखा और 1914 के शिमला समझौते को अवैध मानता है,
ड्रैगन का दावा है कि तिब्बत को उस समय किसी संधि पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं था। यह सीमा रेखा भारत और चीन के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण है।
