Tuesday, September 8, 2026
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ड्रैगन के ह्यूमनॉइड रोबोट्स बढ़ाएंगे भारत का सिरदर्द – Chinese Humanoid Robot

Chinese Humanoid Robot: आज बात करेंगे चीन की… ड्रैगन के ह्यूमनॉइड रोबोट्स की… और भारत के बढ़ते सिरदर्द की…

चीन ऐसे रोबोट बनाने में जुटा है, जो बॉर्डर पर जाकर लड़ेंगे… सेना के कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे. ये देश की सीमा पर कंट्री की रक्षा करेंगे और और दूसरे देश में घुसकर तबाही मचाएंगे. 

ये चीनी रोबोट अब सिर्फ खेल, डांस या होटलों में खाना सर्व नहीं करेंगे, बल्कि दुश्मन और भारत जैसे पड़ोसी देश की नींद उड़ाएंगे..

इस तरह से चीन के ह्यूमनॉइड रोबोट्स अब जंग के मैदान में उतरने को बेताब हैं. 

इंसान जैसे दिखने वाले ये रोबोट्स अब चीन की पीपुल्स रिबरेशन आर्मी का हिस्सा बनने की दहलीज़ पर हैं. जो भारत के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के रक्षा बल से रिटायर ब्रिगेडियर इयान लैंगफोर्ड कहते हैं कि आने वाले समय में चीन अपनी सेना में इंसानों की जगह रोबोट्स को तैनात कर देगा.

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स का कहना है कि चीन… दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक रोबोट बाजार बन गया है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का दावा है कि चीन के रक्षा संस्थान, ह्यूमनॉइड रोबोट्स के सैन्य इस्तेमाल पर काफी रिसर्च कर रहे हैं. और जल्द ही उनकी वॉर में तैनाती हो सकती है.

इसी कड़ी में चीन की सेना, आजकल मशीन गन से लैस रोबोटिक कुत्तों, पक्षी जैसे दिखने वाले ड्रोन्स, और मानव रहित ज़मीनी वाहनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है.

साथ ही पीएलए एआई से चलने वाले भेड़िए जैसे रोबोट्स का भी परीक्षण कर रही है, जिससे आपराधिक घटनाओं को रोकने में उसे मदद मिले.

ख़बर तो ये है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी के पास चीन ने टर्मिनेटर जैसे शुरुआती ऑटोमेटेड रोबोट्स सेना की पेट्रोलिंग के लिए तैनात कर रखे हैं.

चीन सीमाई इलाकों में मानव रहित प्रणालियों और रोबोटिक यूनिट्स का इस्तेमाल कर भारतीय गतिविधियों पर पैनी नज़र रखने की तैयारी में है.

इतना ही नहीं हिमालय के क्षेत्रों में ये रोबोट बिना थके 24 घंटे काम कर सकते हैं.

आप मानो या ना मानो… भारत के लिए और बड़ा ख़तरा बन रहा चीन? LAC पर चीन की इस हरकत से सीमा पर दबाव बढ़ेगा. भारत की मुश्किलें बढ़ेंगी.

वैसे भारत भी DRDO और स्वदेशी रक्षा कंपनियों के माध्यम से रोबोटिक म्यूल्स, मानव रहित ग्राउंड व्हीकल्स और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों को विकसित करने में जुटा है, मगर ड्रैगन की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज है.

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