राहुल की नाक से निकला खून ! ये सांकेतिक नहीं आरपार की लड़ाई ! 4 मोर्चों पर ताल ठोंक रही सरकार ! किसी में दम है तो हिलाकर दिखा दे !
कहते हैं कि जड़ें मज़बूत हों, भुजाओं में ताक़त हो…और उस पर सत्ता का दम हो…तो डेमोक्रेसी कहने-सुनने की बात हो जाती है…
ये आज का भारत है…यहां लोगों की नहीं …सत्ता की गूंज है…
हज़ारों हज़ार छात्र-छात्राएं और हिंदुस्तान की भोली-भाली जनता शिक्षा में हो रही गड़बड़ियों को लेकर ज़वाबदेही की मांग कर रही है.
पब्लिक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की डिमांड कर रही है. लेकिन सरकार कह रही है कि पहले धरना ख़त्म करो… फिर होगी बात …
वहीं देखा जाए तो जंतर-मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से उठी चिंगारी भड़क रही है…
इस दौरान किसानों का आंदोलन पूरे देश में भड़क सकता है.
स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हड़ताल हो सकती है.
संसद जाम हो सकती है…
लेकिन फिर भी सरकार खामोश है. तो इसकी कोई बड़ी वज़ह तो ज़रूर होगी.
हो सकता है कि सरकार खुद को आज़माना चाह रही हो. एक ही साथ सबका मुकाबला करना चाह रही हो.
साथ ही स्टूडेंट्स, पब्लिक, विपक्ष के साथ कांग्रेस को भी एक साथ एक ही तराजू में रखकर अच्छे नंबरों से खुद को पास कराना चाह रही हो…
अब समझिए … नीट पेपर से लेकर शिक्षा व्यवस्था में कई कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं. इसको लेकर कॉकरोच जनता पार्टी काफी समय से आंदोलन कर रही है. जंतर मंतर पर इस आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे.
पुलिस उनको वहां से उठा ले गई. हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया. सीजेपी के चीफ अभिजीत दिपके के आंदोलन को भी तितर-बितर कर दिया.
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी का संसद चलो आंदोलन था. हजारों हज़ार की भीड़ उमड़ी…इस मार्च को रोकने के लिए लाठीचार्ज हुए, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वॉटर कैनन का इस्तेमाल हुआ. दोनों तरफ से पथराव की ख़बरें आईं…इसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबलों को चोटें आईं.
वहीं आज 21 जुलाई को पीएम आवास पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी धरने पर बैठ गए …उनके साथ कांग्रेसी नेता और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी रहे… बाद में प्रदर्शनकारी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस दौरान सड़क पर बैठ गए…और पुलिस उन्हें घसीटते हुए लेकर चली गई.
इस दौरान उनकी नाक से खून बहता नज़र आया. आरोप यह भी लगे हैं कि राहुल के सीने पर भी चोटें लगी हैं.
ऐसे में आपको क्या लगता है कि सरकार को खुद के मन की बात सुननी चाहिए या जनता की आवाज़ भी सुननी चाहिए.
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