LPAR: आज बात करेंगे चीन की खुफिया नज़र से कैसे बचेगा इंडिया..
चीन की 5,000 KM निगरानी… ड्रैगन की आंख भारत पर?
LPAR से कैसे निपटेगा भारत…
चीनी LPAR के मुकाबले स्वदेशी भारतीय शक्ति
भारत के पास चीन के विशाल LPAR (Large Phased Array Radar) या एंटी-हाइपरसोनिक रडार का मुकाबला करने के लिए EL/M-2080 Green Pine और EL/M-2090 Terra/Spectra जैसे अत्यधिक उन्नत अर्ली-वॉर्निंग और ट्रैकिंग रडार सिस्टम मौजूद हैं.
इसके अलावा, भारत की संपूर्ण एंटी-स्टेल्थ ग्रिड और स्वदेशी Netra AWACS आसमान में दुश्मन की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं.
चीन द्वारा म्यांमार की सीमा से सटे यूनान प्रांत में हाल ही में सक्रिय किए गए 5,000 किमी से अधिक रेंज वाले इस LPAR रडार का मुख्य काम भारतीय मिसाइल परीक्षणों (अग्नि-5 आदि) को ट्रैक करना और महत्वपूर्ण तकनीकी डेटा जुटाना है.
इस विशाल जासूसी क्षमता का मुकाबला करने के लिए भारत की रक्षा प्रणाली में प्रमुख काउंटर-रडार शामिल हैं:
EL/M-2080 Green pine: यह इजरायल निर्मित लॉन्ग-रेंज ट्रैकिंग रडार (LTR) है, जो भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) नेटवर्क का मुख्य हिस्सा है.
EL/M-2090 Terra/Spectra: यह वेरी लॉन्ग-रेंज अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम है, जो लंबी दूरी से दुश्मन के हवाई और मिसाइल खतरों का पता लगाने में सक्षम है.
एंटी-स्टेल्थ ग्रिड (Anti-Stealth Radar Grid): चीन और पाकिस्तान के स्टेल्थ विमानों (5th-gen) का मुकाबला करने के लिए भारत ने Mission Sudarshan Chakra के तहत पैसिव टेक्नोलॉजी (PCLR) आधारित नई एंटी-स्टेल्थ रडार ग्रिड तैनात की है.
स्वदेशी ‘Netra’ (नेत्रा): यह भारत का अपना एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) है, जो हवा में उड़ते हुए दुश्मन के सर्विलांस को चकमा देने और रणनीतिक सूचनाएं एकत्र करने में मदद करता है.
इन रडार नेटवर्क्स के जरिए भारत अपनी रणनीतिक मिसाइल रणनीतियों और समुद्री सुरक्षा को सुरक्षित रखता है.
एलपीएआर (LPAR – Large Phased Array Radar) अत्यधिक उन्नत लंबी दूरी का प्रारंभिक चेतावनी देने वाला रडार है. चीन द्वारा म्यांमार की सीमा से सटे यूनान प्रांत में 5,000 किलोमीटर से अधिक की रेंज वाले LPAR (Large Phased Array Radar) को सक्रिय करने से यह चर्चा में है.
इस रडार प्रणाली की ख़ासियत ये है कि यांत्रिक रूप से घूमने वाले पारंपरिक रडार के विपरीत, LPAR इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित एंटेना का उपयोग करता है.
यह तकनीक बहुत कम समय में विशाल क्षेत्रों को स्कैन करने और एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम बनाती है.
यह लंबी दूरी से ही बैलिस्टिक मिसाइल के प्रक्षेपण का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में पता लगाने, उनकी उड़ान को ट्रैक करने और महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में बहुत सटीक है.
चीन की यूनान में Large Phased Array Radar (LPAR) की तैनाती के कारण भारत के पूर्वी हिस्से (जैसे ओडिशा के डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप) से होने वाले मिसाइल परीक्षणों और हिंद महासागर के व्यापक क्षेत्र पर चीनी निगरानी का खतरा बढ़ गया है.
गौर करें तो अमेरिका का Sea-Based X-Band Radar (SBX-1) अपने विशाल आकार, समुद्र में तैरने की अद्वितीय क्षमता और असाधारण ट्रैकिंग रेंज के कारण दुनिया के सबसे शक्तिशाली और खतरनाक रडार सिस्टम्स में से एक माना जाता है.
अमेरिका का सी-बेस्ड एक्स-बैंड रडार (SBX-1) की रेंज 2,000 किलोमीटर तक है. इससे यह बहुत दूर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है.
रूस का एस-500 प्रोमीथियस (S-500 Prometheus) एयर डिफेंस और रडार नेटवर्क दुनिया के सबसे आधुनिक सिस्टम्स में से एक है. यह 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी से हाइपरसोनिक मिसाइलों और अंतरिक्ष-आधारित खतरों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है.
अमेरिका का Spherical Insights SPY-7 (लॉकेड मार्टिन), यह एक मॉड्यूलर सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रडार है जो पारंपरिक रडार की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी है। यह एक साथ कई उन्नत एयर और बैलिस्टिक मिसाइल खतरों को ट्रैक कर सकता है.
भारत का स्वोर्डफ़िश (Swordfish) लॉन्ग-रेंज ट्रैकिंग रडार है, जिसका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम के लिए किया जाता है. यह अंतरिक्ष में 80 किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई पर यात्रा करने वाले 200 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है.
अमेरिका: AN/APY-9 रडार, E-2D एडवांस्ड हॉकआई विमान पर लगा यह रडार अपनी उन्नत तकनीक के कारण स्टील्थ (अदृश्य) विमानों और क्रूज मिसाइलों का आसानी से पता लगा लेता है.
आधुनिक युद्ध में केवल बड़े आकार का रडार ही नहीं, बल्कि एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) तकनीक वाले रडार सबसे घातक माने जाते हैं, जो दुश्मन के जैमर को चकमा देकर सटीक जानकारी देते हैं.
China का LPAR क्या है
Large Phased Array Radar (LPAR) इलेक्ट्रॉनिकली नियंत्रित बड़े फ़ेज़्ड-एरे रडार होते हैं, जो परंपरागत घूर्णन रडार के बजाय कई लक्ष्य एक साथ और तुरंत ट्रैक कर सकते हैं.
LPAR की विशिष्ट विशेषताएँ हैं:
एक ही समय में कई मिसाइल / वस्तुओं की स्थिति, गति और दिशा को ट्रैक कर सकता है.
चीन के युन्नान (Yunnan) स्थित एक LPAR का रेंज ~5,000 किमी से अधिक बताया जा रहा है, जो भारत के पूर्वी तट और मिसाइल परीक्षण साइटों तक निगरानी रख सकता है.
प्रारंभिक चेतावनी (Early Warning)– बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च होने पर उस पर जल्दी प्रतिक्रिया और ट्रैकिंग की क्षमता देता है।
LPAR न केवल मिसाइलों को बल्कि अंतरिक्षीय वस्तुओं और उपग्रहों की ट्रैकिंग में भी मदद करता है.
ये सिस्टम चीन की ** मिसाइल चेतावनी / हवाई रक्षा / अंतरिक्ष निगरानी नेटवर्क का हिस्सा ** हैं और तकनीकी रूप से यूएस के PAVE PAWS जैसे सिस्टम के समान काम करते हैं.
चीन के LPAR के range से चीन को भारत के प्रमुख मिसाइल परीक्षण केंद्र जैसे **Dr APJ Abdul Kalam Island (Odisha)** पर रीयल-टाइम निगरानी रखने का लाभ मिल जाता है, जिससे भारत की मिसाइल प्रोग्राम स्थिति एवं विकास पैटर्न पर व्यापक जानकारी हासिल हो सकती है। ([Business Standard][4])
### 🔹 b) **Early-Warning Dominance**
China को भारत में किसी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च के बारे में पूर्व चेतावनी मिल सकती है, जिससे उसके पास जवाबी रणनीति विकसित करने की समय-समानता बढ़ सकती है।
LPAR केवल “देखने” के लिए नहीं है — यह इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) सिग्नलों को भी संभाल सकता है. इससे कम्युनिकेशन, नेविगेशन, और GPS जैसे सूचनात्मक प्रणालियों में व्यवधान संभव हो सकता है.
चीन की यह तकनीक भारत की मिसाइल गोपनीयता, रणनीतिक आत्मनिर्भरता, और सूचना सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है.
अब भारत की मौजूदा Radar & Surveillance क्षमता पर नज़र दौड़ाते हैं.
भारत अपनी वायु रक्षा और मिसाइल चेतावनी प्रणाली में पहले से ही कई उन्नत राडार नेटवर्क रखता है.
भारत के पास Swordfish Long Range Tracking Radar (LRTR) है. यह – DRDO द्वारा विकसित और भारत के BMD यानी Ballistic Missile Defence कार्यक्रम का दिल है. यह 600–1500 km ट्रैकिंग क्षमता रखता है.
इंडिया के पास Netra AEW&C & MkII AWACS है. एयरबोर्न एक्सटेंडेड रडार प्लैटफ़ॉर्म है, जो लंबी दूरी के लक्ष्य और मिसाइल ट्रैक कर सकता है, यह भारत के ISR नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
भारत के पास Ashwini Low Level Transportable Radars (LLTR) है. यह मोबाइल रडार है, जो गतिशील निगरानी प्रदान करता है.
इसके साथ ही भारत के पास Surya, Arudhra, Rohini, 3D-CAR जैसे विविध कार्यों के लिए बहु-परत प्रणाली में जुड़े Surveillance Radars हैं.
इस तरह से देखें तो भारत का बहु-तह प्रणाली RADAR नेटवर्क चीन के LPAR की तुलना में अपनी गति, कवर और एडवांस सिस्टम का अद्भुत जोड़ बनाता है, हालांकि चीन के “दीर्घ-परास LPAR” का रेंज भारत की पारंपरिक प्रणालियों से काफी आगे है.
इसके साथ ही भारत Swordfish LRTR जैसे सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है, ताकि long-range ballistic threat tracking में क्षमता बढ़ाई जा सके.
साथ ही भारत के पास इन्हैंस्ड Early-Warning और Satellite ISR है.
इसके अलावा AWACS जैसे Netra MkII) और स्पेस-आधारित ISR assets भारतीय स्थिति-ज्ञान बढ़ाने में मदद करते हैं. जिससे LPAR के एल्गोरिदमिक ट्रैक डेटा को चुनौती दी जा सके.
इसके साथ ही भारत का Ballistic Missile Defence (BMD) के साथ Multi-Layer Air Defence (INS Dhruv, S-400, Project Kusha एक नेटवर्क बनाते हैं, जो Threat Neutralisation को सक्षम करते हैं.
भारतीय सेना डेडिकेटेड **Anti-Radiation Missiles (जैसे Rudram-II)** जैसे हथियारों पर काम कर रही है, जो किसी भी उन्नत रडार सिस्टम को निशाना बना सकते हैं.
सीमा पार Electronic Warfare (EW) और Cyber Defenses को मजबूत किया जा रहा है, जिससे चीन के LPAR जैसे कनेक्टेड सिस्टम को प्रभावी रूप से डिटेक्ट और भेद भी किया जा सके
चीन का LPAR भारत के मिसाइल कार्यक्रम और सामरिक निर्णय-प्रक्रियाओं पर एक नया चुनौती-मंच है, क्योंकि यह लंबी दूरी पर निगरानी और ट्रैकिंग डेटा प्रदान करता है.
भारत के पास पहले से ही Radar + ISR + BMD नेटवर्क है, लेकिन उसे अपने रडार क्षमताओं, डेटा फ्यूज़न और यूज़-केस-स्पेस तकनीकों को त्वरित रूप से उन्नत करने की आवश्यकता है, ताकि यह LPAR के जरिए मिलने वाली खुफिया जानकारी की प्रभावशीलता को संतुलित या सीमित कर सके.
LPAR चीन को भारतीय मिसाइल परीक्षण, trajectories और रणनीतिक गतिविधियों पर दृश्यता देता है, जिससे उसे भविष्य की ज़वाबी रणनीतियाँ तैयार करने में मदद मिलती है.
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