आज बात करेंगे BRICS की…इस मंच पर भारत के फायदे की… और नुकसान के जोख़िम की…
भारत BRICS का अध्यक्ष है…और नई दिल्ली में BRICS का शिखर सम्मेलन हुआ है.
ऐसे में बड़ा सवाल है—
क्या BRICS भारत के लिए रणनीतिक ताक़त बन रहा है… या आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां भी बढ़ा रहा है?
क्योंकि BRICS की तस्वीर में सबसे पहले बात उस चिंता की… जो सीधे भारत की इकॉनमी से जुड़ी है.
भारत का BRICS के साथ व्यापार तो बढ़ रहा है… लेकिन हैरानी की बात ये है कि इंपोर्ट, एक्सपोर्ट से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है.
FY2026 में भारत का ये व्यापार घाटा 226 अरब डॉलर का रहा है. वहीं चीन के साथ भारत का अकेले घाटा 112 अरब डॉलर रहा है.
FY2026 में भारत ने BRICS के दूसरे सदस्य देशों से करीब 322 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि निर्यात सिर्फ और सिर्फ 96 अरब डॉलर रहा. यानी भारत का व्यापार घाटा करीब 226 अरब डॉलर पहुंच गया.
और ये आंकड़ा पांच साल पहले के करीब 75 अरब डॉलर के घाटे से तीन गुना से भी ज्यादा है.
FY2026 में भारत ने चीन से करीब 132 अरब डॉलर का आयात किया…
जबकि चीन को भारत का निर्यात करीब 20 अरब डॉलर रहा.
इस तरह से अकेले चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर है.
वहीं BRICS के सभी देशों के बीच merchandise trade अब तक 1.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है.
इस तरह से देखें तो BRICS के साथ भारत के मौजूदा व्यापार संतुलन में बड़ी चुनौती है.
फिर भी BRICS भारत को बाजार देता है…
ऊर्जा सुरक्षा का अवसर देता है…
कूटनीतिक ताक़त देता है…
और Global South में भारत की आवाज़ मज़बूत करता है.
लेकिन दूसरी तरफ…चीन का आर्थिक प्रभाव बढ़ रहा है…
भारत का व्यापार घाटा बहुत बड़ा है…
वहीं यूएस और पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भी ज़रूरी है.
इन हालातों में भारत के लिए असली परीक्षा BRICS से मिलने वाला नतीजे हैं.
भारत कितना निवेश ला पाता है?
कितना निर्यात बढ़ा पाता है?
और कितनी नौकरियां और कितने नए बाज़ार बना पाता है?
और सबसे अहम…
क्या भारत BRICS के साथ व्यापार बढ़ाते हुए अपना व्यापार घाटा कम कर पाता है?
क्योंकि असली सवाल ये नहीं है कि…
BRICS भारत के लिए अच्छा है या बुरा?
असली सवाल है—
BRICS से भारत कितना कमाता है…
कितना व्यापार बढ़ाता है…
और उस बढ़ते व्यापार में भारत का हिस्सेदारी कितनी है?
