Wednesday, September 16, 2026
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क्या अब ₹2,000 से ज्यादा का UPI PAYMENT करने पर आम आदमी की जेब कटेगी?

आज बात UPI के उस नए नियम की, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सवाल है—

क्या अब ₹2,000 से ज्यादा का UPI पेमेंट करने पर आम आदमी की जेब कटेगी? मीडिया ने जब इ विषय में अमिताभ बच्चन से जानना चाहा, तो उनका ज़वाब नहीं आया.

तो सबसे पहले भ्रम दूर कर देते हैं…

पहला—ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?

एक—व्यक्ति से व्यक्ति को किया जाने वाला UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेगा।**

यानी आपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजे—

उस पर MDR नहीं लगेगा।

दो—₹2,000 तक के UPI पेमेंट मुफ्त रहेंगे।

यानी छोटी खरीदारी करने वाले आम ग्राहक पर सीधा कोई चार्ज नहीं।

तीन—₹2,000 से ज्यादा का मर्चेंट पेमेंट करने पर भी ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं है।

सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि व्यापारी यह लागत ग्राहक पर न डालें। 

₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क नहीं है। यानी रेहड़ी-पटरी वाले, छोटी दुकान और रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले लोगों पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा।

लेकिन नुकसान भी समझिए…

पहला नुकसान—बड़े भुगतान करने वाले व्यापारियों की लागत बढ़ेगी।

जैसे- ₹10,000 का UPI पेमेंट आया तो 0.4% के हिसाब से MDR यानी Merchant Discount Rate ₹40 होगा।

₹50,000 पर **₹200**।

और ₹75,000 या उससे ज्यादा पर अधिकतम ₹300

यानी ग्राहक से सीधे पैसा नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी की लागत जरूर बढ़ेगी। 

दूसरा खतरा—व्यापारी यह लागत किसी दूसरे तरीके से ग्राहक तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

सरकार ने ग्राहक पर MDR डालने से रोकने की बात कही है, लेकिन बाजार में व्यापारी कीमत बढ़ाकर या दूसरी फीस जोड़कर इसका असर डालते हैं या नहीं—इस पर नजर रखनी होगी।

तो आम आदमी क्या समझे?

घबराने की जरूरत नहीं है।

अगर आप दोस्त को ₹10,000 भेजते हैं—मुफ्त।

अगर आप किसी दुकान पर ₹2000 तक का सामान खरीदते हैं तो मुफ्त रहेगा.

अगर आप किसी व्यापारी को ₹10,000 का UPI पेमेंट करते हैं—MDR व्यापारी पर है, ग्राहक पर नहीं।

UPI पर आम आदमी का भुगतान अब भी मुफ्त है।

बदलाव मुख्य रूप से बड़े P2M यानी Person-to-Merchant ट्रांजैक्शन की लागत को लेकर है।

अब असली सवाल यह है—

**क्या यह बदलाव UPI को लंबे समय के लिए मजबूत बनाएगा,

या फिर बड़े डिजिटल पेमेंट की लागत बढ़ाकर व्यापारियों पर नया बोझ डालेगा?**

यही इस नए नियम की असली परीक्षा होगी।

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