आज हम बात करेंगे इंडिया ब्लॉक की छटपटाहट की…बेचैनी की…कुछ कर गुजरने की उनकी ख्वाहिश की…बीजेपी और मोदी सरकार से टकराने की…India Block
देखा जाए तो हाल के दिनों में देश में एक अलग तरह की लहर दिख रही है…जेन जी का उभार आया है…सोशल साइट पर दिखे लोगों के गुस्से ने मोदी राज को हिला दिया है…वो बैकफुट पर है..
वहीं विपक्ष को उसकी ज़मीन खिसकती नज़र आ रही है. उसे ये डर सताने लगा है कि अगर युवा पीढ़ी सड़कों पर उतर गई तो उनकी हालत सड़े टमाटर जैसी हो जाएगी.
इन्हीं सब के बीच इंडिया ब्लॉक ने दिल्ली में अचानक बैठक बुला ली और दो ही घंटे की बैठक में फैसला भी ले लिया.
इंडिया गठबंधन की मीटिंग में 5 मुद्दों पर सहमति बनी है.
गठबंधन ने NEET और CBSE की गड़बड़ी के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगा.
इंडिया एलाइंस SIR और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर CJI को पत्र लिखेगा.
इंडिया ब्लॉक चाहता है कि मोदी सरकार महंगाई, बेरोज़गारी और अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाए.
बैठक में तय हुआ कि इंडिया गठबंधन हरेक 2 महीने में बैठक करेगा. इसके साथ ही ये भी फैसला लिया गया कि मॉनसून सत्र के दौरान हरेक दिन सुबह बैठक होगी.
गौर करें तो INDIA ब्लॉक की 2 साल बाद हुई बैठक में 23 दलों के नेता शामिल हुए.
दिल्ली में हुई बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले, कपिल सिब्बल समेत कई नेता मौजूद रहे.
वहीं शिवसेना यूबीटी के उद्धव ठाकरे और झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन वर्चुअली जुड़े.
निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल भी बैठक में मौजूद रहे…
इस तरह से देखें तो यूपी सहित कई राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा इलेक्शन को लेकर अपोजिशन अपनी रणनीति पर विचार करना चाहता है, ताकि वह सत्ता से मुकाबला कर सके.
एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ रणनीति तय कर सके. अपने गिले-शिकवे और कटे-फटे पर मलहम लगा सके.
लेकिन सवाल उठता कि आज दो साल बाद इंडिया ब्लॉक की अचानक नींद कैसे खुल गई…
विपक्ष आज बीजेपी सरकार के कई फैसलों और नीतियों को लेकर छटपटा क्यों रहा है.
चुनाव से जुड़े मुद्दे, रोज़गार-महंगाई आदि को लेकर एक सुर में आवाज़ क्यों उठाने लगा है.
क्या उन्हें ये डर सताने लगा है कि उनकी जगह कॉकरोच जनता पार्टी ले लेगी.
