Thursday, May 30, 2024
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Vipassana Nritya Natika: मन को जीतने की कला है विपश्यना – डॉ. नंद नंदन भिक्षु

Vipassana Nritya Natika: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) के सहयोग से कल्चरल क्वेस्ट द्वारा प्रस्तुत “विपश्यना नृत्य नाटिका” वासवदत्ता का मंचन संत गाडगे जी महाराज में हुआ। इसमें मुख्य अतिथि एमएलसी मुकेश शर्मा,भिक्खु डॉ. नंद रतन, कुँ अक्षय प्रताप सिंह “गोपाल भैया”, हरगोविंद कुशवाहा, कुँ बृजेश सिंह राजावत, सुलखान सिंह, बाबा हरदेव सिंह आदि मौजूद ते।

“महात्मा बुद्ध की गूढ़ ध्यान विधि (विपश्यना) को नृत्य नाटिका वासवदत्ता के माध्यम से मंचित किया गया। पहली बार किसी नृत्य नाटिका के माध्यम से “विपश्यना ध्यान विधि” जो की दुखों से मुक्ति पाने का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है। और स्वयं में जाकर अपनी ही ध्यान की शक्ति से आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलकर जीवन के उद्देश्य को जानने की प्रक्रिया को इसके माध्यम से बताया गया है। आज की युवा पीढ़ी को बहुत ही गूढ़ और सार्थक विषय को इस नाटिका के माध्यम से उठाकर प्रेरित करने की कोशिश की गयी है।

भारत सरकार संस्कृति विभाग द्वारा सहयोग प्राप्त हुआ एवं हेल्प यू ट्रस्ट तथा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान ने भी अपना सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम की परिकल्पना, प्रस्तुति एवं निर्देशन गुरु सुरभि सिंह के द्वारा किया गया था | पटकथा पद्मश्री योगेश प्रवीण जी की थी। डायलॉग्स वॉइस ओवर ललित सिंह पोखरिया जी का था ।

संगीत परिकल्पना पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य (कलकत्ता) स्वर एवं संगीत समायोजन सुप्रियो दत्ता (कलकत्ता) तबला, वॉइस ओवर एवं उपगुप्त की भूमिका में पंडित विकास मिश्र जी रहे। मंच पर कलाकारों में मुख्य भूमिका में सुरभि सिंह की वरिष्ठ शिष्याएँ ईशा रतन, मीशा रतन, आकांक्षा पाण्डे, अंकिता मिश्रा, अपर्णा शर्मा, ममता बाजपेयी, आरती, संगीता कश्यप इत्यादि रहे |

नाटक के पात्रों में मोहित कपूर, हेमंत, सुश्रुत, गुरुदत पाण्डे, सौरभ इत्यादि ने अपना कार्य बखूबी संभाला। टेक्निकल टीम में आर्टिस्टिक एवं ग्राफ़िक आशीष कश्यप, लाइट प्रणव बर्मन (दिल्ली) मेकअप मनोज वर्मा एवं शहीर का रहा। सेट मो० शकील द्वारा लगाया गया । कार्यक्रम की व्यवस्था सहारा बानो द्वारा की गयी। कार्यक्रम की थीम

पहली बार किसी नृत्य नाटिका के माध्यम से “विपश्यना ध्यान विधि” जो की दुखों से मुक्ति पाने का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है। और स्वयं में जाकर अपनी ही ध्यान की शक्ति से आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलकर जीवन के उद्देश्य को जानने की प्रक्रिया को इसके माध्यम से बताया गया है। आज की युवा पीढ़ी को बहुत ही गूढ़ और सार्थक विषय को इस नाटिका के माध्यम से उठाकर प्रेरित करने की कोशिश की गयी है।

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