Thursday, May 30, 2024
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Lucknow Pustak Mela: युवा हाथों में है साहित्य की मशाल : विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना

डॉ. मनीष शुक्ल के कहानी संग्रह प्रोफेसर माँ के लाल का किया विमोचन

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शिल्पायन बुक्स प्रकाशन की तीन पुस्तकों का किया विमोचन

सतीश महाना ने वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री की किताब भुला न देना और रश्मि कौशल की महाशून्य का भी किया विमोचन

Lucknow Pustak Mela: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने डिजिटल युग में साहित्य लेखन का भविष्य उज्ज्वल बताया| लखनऊ पुस्तक मेले में जाने माने लेखकों की किताबों का विमोचन करते हुए उन्होने युवाओं के तकनीक और साहित्य के संगम को जरूरी बताया|

विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि हिन्दी साहित्य अजरअमर है| आज युवा हाथों में साहित्य कि मशाल है जो समाज को रोशन कर रही है| इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कथाकार, व्यंग्यकार व कवि डॉ. मनीष शुक्ल की पुस्तक प्रोफेसर माँ के लाल के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री की किताब भुला न देना का विमोचन किया|

लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि श्री महाना ने कहा साहित्य का सागर अनंत है| जो आपके जीवन की धारा को सुगम बनाता है| युवाओं को तकनीक के साथ ही साहित्य में बढ़- चढ़ हिस्सा लेना चाहिए| क्योंकि संस्कृति और साहित्य ही समाज को सही दिशा प्रदान करता है| युवा साहित्य कि माशल से समाज को रोशन कर सकते हैं|

प्रोफेसर माँ के लाल कहानी के लेखक डॉक्टर मनीष ने कहा कि कहानियाँ आपके आसपास बिखरी हुई हैं। बस उनको शब्दों में पिरोने की जरूरत है| प्रोफेसर माँ के लाल भी जीवन में होने वाली घटनाओं से ली गई कहानियों का संग्रह है|

श्रीधर अग्निहोत्री ने अपनी किताब भुला न देना के विषय में बताया कि किताब में उन कलाकारों को जिक्र है जो कभी सिनेमा और टीवी के सुपर स्टार थे लेकिन वक्त के साथ उनकी चमक फीकी पड़ गई और वो भुला दिये गए| ये किताब ऐसे ही कलाकारों को याद करती है|

इसके साथ ही रश्मि कौशल की किताब महाशून्य का विमोचन हुआ| इस अवसर विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की प्रधान संपादिका डॉक्टर अमिता दुबे, सिद्धार्थ कलहंस, विनोद शुक्ल, अलका प्रमोद, रेखा बोरा, डॉक्टर शिल्पी शुक्ला, पंचानन मिश्र, मनोज शुक्ल मनुज, राजीव तिवारी, चंद्रभूषण सिंह, गजल गायक सरभजीत सिंह आदि उपस्थित रहे| समारोह के दूसरे सत्र में चर्चित कवियों ने काव्यपाठ किया|

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