Thursday, May 30, 2024
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India May Still Poor: भारत प्रति व्यक्ति आय के मामले में 139वें नंबर पर

India May Still Poor: रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा कि 2,600 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ भारत प्रति व्यक्ति आय के मामले में राष्ट्र संघ में 139वें स्थान पर है। और ब्रिक्स और जी-20 देशों में सबसे गरीब है। और आगे भी गरीब बना रह सकता है। ये बातें जानेमाने अर्थशास्त्री और आरबीआई के पूर्व गवर्नर सुब्बाराव ने एक किताब के विमोचन के दौरान कही।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर सुब्बाराव का कहना है कि तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का टैग जश्न मनाने का कोई कारण नहीं है। भारत आगे भी गरीब रह सकता है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि साल 2029 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भी भारत एक गरीब देश ही हो सकता है। इसलिए जश्न मनाने का कोई कारण नहीं है।

पीएम मोदी की उस बात को याद करते हुए डी सुब्बाराव ने कहाकि जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वह कार्यालय में लौटते हैं, तो भारत 2029 से पहले दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मतलब पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल के अंत से पहले अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

डी सुब्बा राव ने कहाकि यह संभव है भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है, लेकिन यह कोई उत्सव नहीं है। क्यों? हम एक बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, क्योंकि हम 1.40 अरब लोग हैं। और लोग उत्पादन का एक कारक हैं। इसलिए हम एक बड़ी अर्थव्यवस्था हैं क्योंकि हमारे पास लोग हैं। लेकिन हम अब भी एक गरीब देश हैं, सुब्बाराव ने कहा, भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका आंकड़ा 4 ट्रिलियन डॉलर है।

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहाकि संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के अनुसार भारत 2,600 डॉलर प्रति व्यक्ति आय के साथ, दुनिया में 139वें पायदान पर है। इसके साथ ही ब्रिक्स और जी-20 देशों में सबसे गरीब देश है।

उन्होंने कहा कि विकास दर में तेजी लाएं और सुनिश्चित करें कि लाभ साझा किया जाएगा। सुब्बाराव ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनना होगा।

सुब्बाराव ने दो टूक शब्दों में कहाकि एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए चार आवश्यक तत्वों की ज़रूरत होती है। पहली बात ये है कि कानून का शासन होना चाहिए। दूसरी बात है कि एक मज़बूत राज्य होना चाहिए। इसके साथ ही देश की अपनी ज़वाबदेही होनी चाहिए। इसके अलावा स्वतंत्र संस्थान की आवश्यकता होती है।

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