Saturday, February 24, 2024
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Manipur Violence Effects: करगिल में देश को बचाया, मणिपुर में पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका

Manipur Violence Effects: सदमे में हैं मणिपुर में निर्वस्त्र घुमाई गई महिला के पति रिटायर्ड सूबेदार

Manipur Violence Effects: मणिपुर हिंसा से दुनिया शर्मसार है। मणिपुर में निर्वस्त्र घुमाई गई महिला के पति रिटायर्ड सूबेदार सदमे में हैं। वो बोले- करगिल युद्ध में देश को दुश्मनों से बचाया, लेकिन पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका।

Manipur Violence Effects: मणिपुर में जिन दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया था, उनमें से एक के पति आर्मी में सूबेदार थे। उनका कहना कि मैंने करगिल युद्ध में देश को दुश्मनों से बचाया लेकिन दंगाइयों से अपनी पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका।

Manipur Violence Effects: उन्होंने बताया- हजार लोगों की भीड़ ने गांव पर हमला किया था। मैं भीड़ से अपनी पत्नी और गांव वालों को नहीं बचा पाया। पुलिस वालों ने भी हमें सुरक्षा नहीं दी। भीड़ तीन घंटे तक दरिंदगी करती रही। मेरी पत्नी ने किसी तरह एक गांव में पनाह ली। वह कई दिनों तक सदमे में रही। घटना के ढाई महीने बाद भी उसकी आंखों में गुस्सा और बेबसी है।

वहीं, वीडियो में दिख रही दूसरी महिला की मां ने कहा- अब हम कभी अपने गांव नहीं लौटेंगे। वहां मेरे छोटे लड़के की गोली मारकर हत्या कर दी गई, मेरी बेटी को शर्मिंदा किया गया। अब मेरे लिए सब कुछ खत्म हो चुका है।

Manipur Violence Effects: महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना 4 मई को थोउबाल जिले में हुई थी। इसका वीडियो 19 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कुछ लोग दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके ले जा रहे हैं और उनसे अश्लील हरकतें कर रहे हैं।

पुलिस ने मामले में अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चारों आरोपियों को शुक्रवार (21 जुलाई) को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 11 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है। घटना के मुख्य आरोपी हुईरेम हिरोदास मैतेई (32) की है। दूसरा फोटो वीडियो से लिया गया है, जिसमें आरोपी दिखाई दे रहा है। फिलहाल, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।

Manipur Violence Effects: मणिपुर में 3 मई से 28 जून तक 5960 FIR दर्ज हुईं। इनमें से 1771 मामले जीरो FIR के रूप में दर्ज हुए। इनमें से एक तिहाई मामले महिला उत्पीड़न से जुड़े हुए थे। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, मणिपुर में 2019 में 2830, 2020 में 2349 और 2021 में 2484 FIR ही दर्ज हुई थीं। वहीं, इस साल मई-जून में ही लगभग 6 हजार मामले दर्ज हो गए।

राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने खुद माना है कि हिंसा के दौरान में राज्य के विभिन्न थानों में हजारों FIR दर्ज हुई हैं। जातीय हिंसा की वजह से लोग FIR दर्ज कराने के लिए एक-दूसरे के क्षेत्र में नहीं जा रहे। जीरो FIR दिल्ली, आइजोल और गुवाहाटी में भी दर्ज हो रही हैं।

Manipur Violence Effects: ममता ने भाजपा से पूछा- बेटी बचाओ नारा कहां है? पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- आपने ‘बेटी बचाओ’ का नारा दिया था, अब आपका नारा कहां है। आज मणिपुर जल रहा है, पूरा देश जल रहा है। आप पश्चिम बंगाल पर उंगली उठाते हैं, लेकिन क्या आपको बहनों और मांओं के लिए प्यार नहीं है? कब तक बेटियां जलाई जाएंगी?

वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले मणिपुर की घटना पर दुख व्यक्त किया था।

Manipur Violence Effects: मणिपुर हिंसा को लेकर शुक्रवार को दूसरे दिन विपक्षी दलों ने हंगामा किया। जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई। दोनों सदनों को 24 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार चर्चा करने को तैयार है। कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने दोनों सदनों में चर्चा का नोटिस दिया था।

Manipur Violence Effects: मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतेई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इम्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

Manipur Violence Effects: कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नगा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

21 साल की पीड़िता ने कहा- ‘वो हमारे कपड़े उतरवा रहे थे, पुलिस चुपचाप खड़ी थी’। ‘हम पुलिस की गाड़ी में थे। लगा था, वो हमें बचा लेंगे। मैतेई लड़कों की भीड़ ने गाड़ी को घेर लिया। उन्होंने कहा- जिंदा रहना है, तो कपड़े उतारो। हमने मदद के लिए पुलिसवालों की तरफ देखा, उन्होंने मुंह फेर लिया। फिर हमने कपड़े उतार दिए….’। ये कहना है 21 साल की पीड़िता का। 

Manipur Violence Effects: मणिपुर में हिंसा शुरू हुए ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं। जल चुके 120 से ज्यादा गांव, 3,500 घर, 220 चर्च और 15 मंदिर हिंसा की निशानी के तौर पर खड़े हैं। इस तबाही में खाली स्कूल और खेत भी जुड़ चुके हैं। अब देखना है कि डबल इंजन की सरकार क्या कदम उठाती है। 

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