Friday, February 23, 2024
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Lok Sabha Election 2024: इंडिया की मज़बूती के लिए प्रियंका और मायावती में मुलाक़ात

इंडिया गठबंधन में आ सकती है बसपा

Lok Sabha Election 2024: इंडिया ब्लॉक की मज़बूती के लिए कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी और बसपी चीफ मायावती में नज़दीकियाँ बढ़ गई हैं। कयास हैं कि बसपा इंडिया गठबंधन में आ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक अगस्त में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच मुलाकात भी हुई है। 

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और बसपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत शुरू हुई थी। तब ये बातचीत अपने मुकाम तक तो नहीं पहुंच सकी थी, लेकिन तब से दोनों के बीच संवाद जारी है। दोनों पार्टियाँ और सोनिया गांधी और मायावती कभी एक-दूसरे के क़रीब होती थीं।

विपक्षी समावेशी गठबंधन ‘इंडिया’ में बसपा को लाने के अंदरखाने प्रयास किए जा रहे हैं। सब कुछ इसी तरह से चलता रहा तो 5 राज्यों के चुनाव के बाद इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। इसमें कांग्रेस सूत्रधार की भूमिका में हैं। कवायद के तहत दोनों ओर के प्रथम परिवारों के बीच कई राउंड की बातचीत भी हो चुकी है।

लोकसभा चुनाव जीतने के लिए इंडिया गठबंधन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। बसपा को साथ लाने की कोशिशें उसी रणनीति का हिस्सा है। यूपी के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और बसपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ था। तब यह बातचीत अपने मुकाम तक तो नहीं पहुंच सकी थी, लेकिन तब से दोनों के बीच संवाद बना हुआ है। 

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच मुलाकात भी हो चुकी है। बसपा की ओर से अब नेतृत्व के पारिवारिक हो चुके एक पूर्व सांसद की भी इसमें अहम भूमिका बताई जा रही है।

यूपी के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा-कांग्रेस की गठबंधन की खिचड़ी पकने की खबर लीक हो गई थी। तब तय हुआ था कि विधानसभा की 125 सीटों पर कांग्रेस और शेष 278 सीटों पर बसपा लड़ेगी। फिर मामला आगे नहीं बढ़ पाया था।

चुनाव के बाद राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से कहा भी था कि हम बसपा को आगे रखकर यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, पर वह तैयार नहीं हुई। इस बार लोकसभा चुनाव के ऐन पहले ही आधिकारिक रूप से घोषणा करने की रणनीति है।

गांधी परिवार के नज़दीकी नेता के मुताबिक वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ कांग्रेस के अनुभव अच्छे नहीं रहे। उस चुनाव में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने की बात सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार कहते रहे, लेकिन 145 सीट देने के वादे के बावजूद कांग्रेस को 105 सीटें दी गईं। उसमें से भी अनुराग भदौरिया जैसे 10 प्रत्याशी सपा ने अपने लड़ाए थे। इस तरह से देखा जाए तो कांग्रेस के हिस्से में मात्र 95 सीटें ही आई थीं।

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