Raymond Group को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले विजयपत सिंघानिया नहीं रहे…सबसे पहले तो विनम्र श्रद्धांजलि…
भारतीय कॉरपोरेट जगत का सितारा रहे विजयपत सिंघानिया ने दुनिया को अलविदा कह दिया.. विजयपत वो नाम था, जो सिर्फ़ बिज़नेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपनी सोच, जोखिम और अनुभव की मिसाल बन गए… आज विजयपत सिंघानिया से जुड़ी चंद बातों पर चर्चा करते हैं.
4 अक्टूबर 1938 को यूपी के कानपुर में जन्मे विजयपत सिंघानिया, भारत के जाने-माने उद्योगपति और एविएटर रहे हैं…
1960 के दशक में Raymond Group से जुड़े विजयपत सिंघानिया ने 1980 के दशक में कंपनी की बागडोर संभाली।
उनके नेतृत्व में Raymond सिर्फ़ सूटिंग-शर्टिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Park Avenue और ColorPlus जैसे ब्रांड्स के ज़रिए रेडीमेड अपैरल में भी एक मजबूत पहचान बनाई।
और वो दौर आया जब रेमंड की “The Complete Man” — टैगलाइन …भारतीय मेंसवियर की पहचान बन गई।
Raymond को बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए उनके किए गए योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
विजयपत सिंघानिया एक जुनूनी एविएटर भी थे।5,000 से ज़्यादा उड़ान घंटों की उड़ान भरी…
ब्रिटेन से भारत तक माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट की सोलो फ्लाइट भी की.
इतना ही नहीं 67 साल की उम्र में हॉट-एयर बैलून से 69,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी…जो उनके साहस और जोखिम उठाने की ताकत को बताता है. भारतीय वायुसेना ने भी उन्हें मानद एयर कमोडोर की उपाधि दी थी।
लेकिन ज़िंदगी का दूसरा पहलू उतना ही कठिन रहा।
साल 2015 में उन्होंने Raymond की हिस्सेदारी अपने बेटे को सौंप दी।
इसके बाद पिता-पुत्र के रिश्तों में तनाव आया, वो घर से बेघर हो गए.
आज विजयपत सिंघानिया की कहानी एक साथ कई सबक देती है —
एक तरफ़ रेमंड को भारत का ग्लोबल ब्रांड बनाने की सफलता,
तो दूसरी तरफ़ पारिवारिक उत्तराधिकार को लेकर की गई जल्दबाज़ी का पछतावा…
जाते-जाते विजयपत सिंघानिया ये सीख दे गए कि सफलता के लिए जुनूनी बनो, साहसी बनो और खतरों से न डरो…वहीं एक बड़ी सीख दे गए कि जल्दबाज़ी में बड़ा फैसला न लें…
अपने बुरे दौर में विजयपत सिंघानिया कहते थे कि “माता-पिता को जीते-जी बच्चों को अपनी पूरी संपत्ति का वारिस नहीं बनाना चाहिए”.
वो सही थे या गलत…ये फैसला आप पर है.
एक बार फिर उस महान शक्सियत को सलाम…
