Peace Talk Between US Iran: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई पीस वार्ता में यूएस और ईरान में से कोई झुकने को तैयार नहीं है.
“सीजफायर हुआ… लेकिन शांति नहीं.
ईरान और अमेरिका—युद्ध से रुके, लेकिन टकराव से नहीं”
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में मुख्य विवाद अब भी परमाणु हथियारों को लेकर बना हुआ है.
इस्लामाबाद में फेल हुई शांति वार्ता के बाद ईरान ने कहा, अमेरिका की ओर से बहुत ज्यादा डिमांड रखी गई थीं, जिन्हें हम किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं
वहीं लेबनान को लेकर US की तरफ से ईरान को कोई कमिटमेंट नहीं मिला.
उधर अमेरिका का साफ कहना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने को लेकर कोई सॉलिड कमिटमेंट नहीं कर रहा है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, हमने ईरान को बेस्ट ऑफर दिया था, लेकिन वो मानने को हरगिज़ तैयार नहीं हैं. और अब गेंद.. पूरी तरह से ईरान के पाले में है.
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच 21 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद दिखा कि दोनों देश अपने-
अपने मुद्दों को लेकर कतई झुकने को तैयार नहीं…
”गौरतलब है कि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम… शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अमेरिका और इजरायल उसकी इस बात पर भरोसा नहीं करते. इसी तनाव के चलते 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले किए थे.
ईरान और अमेरिका की बातचीत के फेल होने की एक बड़ी वज़ह होर्मुज स्ट्रेट है. ईरान… यहां पूरी तरह से अपना कब्ज़ा चाहता है. लेकिन अमेरिका ने साफ कह दिया है कि ये इंटरनेशनल रास्ता है. जिसे कोई भी देश रोक नहीं सकता. जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका.. इस रास्ते को खुला रखने के लिए जंग लड़ने को तैयार है.
उधर वार्ता फेल होने के बावज़ूद पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि शांति वार्ता का कोई हल ज़रूर निकलेगा, जिससे मिडिल ईस्ट में माहौल सुधरेगा, और दुनिया इस तनाव से उबरेगी.
“अगर होर्मुज बंद हुआ, तो तेल महंगा होगा—और उसकी मार भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगी.”
अमेरिका और ईरान के बीच ..“सीजफायर काग़ज़ों पर है,
लेकिन ज़मीन पर भरोसा नहीं दिख रहा
और जब तक भरोसा नहीं…
तब तक मिडिल ईस्ट में शांति सिर्फ़ और सिर्फ़.. एक उम्मीद है.”
