Saturday, November 29, 2025
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Hansie Cronje और दुनिया का पहला मैच फिक्सिंग केस: जानें कैसे उजागर किया था दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक DSP ने

सवाल: दुनिया के पहले अधिकृत मैच फिक्सिंग केस का भंडाभोड़ भारत ने किया था और उस केस को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम के साथ आपने उजागर किया था. कुछ बताएंगे.

प्रदीप श्रीवास्तव: यह वाकया सन 2000 का है, जब माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम और अबू सलेम के गुर्गे भारतीय शहरों सूरत, जयपुर और दिल्ली में एक बड़ा उगाही (एक्सटॉर्शन) वाला रैकेट चला रहे थे। शाम को बड़े व्यापारियों के पास फोन आ जाते थे कि इतना पैसा निकाल कर रखना, अगले दिन हमारा आदमी आकर ले जाएगा। डिमांड पूरी न करने पर मोटरसाइकिल सवार बदमाश उस बिजनेसमैन के घर के बाहर हवा में दो गोली चलाकर भाग जाते थे। इस फायरिंग से व्यापारी डर जाते थे। शहर में काफी पैनिक था। 

मैं उस दौर में दिल्ली पुलिस में डीसीपी क्राइम ब्रांच था और एक्सटॉर्शन की इन धमकियों को देख रहा था। इसी सिलसिले में हमने कुछ बिजनेसमैन के फोन रिकॉर्डिंग पर लगाए हुए थे और कोशिश थी कि उगाही के लिए आए हुए अपराधियों को मौके पर ही पकड़ा जा सके और दिल्ली के लोकल सेल को पहचाना जाए और खत्म किया जा सके। यह वह समय था, जबकि टेलीफोन डिपाटर्मेंट हमारे ही किसी लैंडलाइन पर निगरानी में रखे फोन का पैरेलल कनेक्शन दे देता था और वह लैंडलाइन किसी कैसेट रिकॉर्डर से जोड़ दी जाती थी।

अमूमन यह रिकॉर्डिंग सुनने का काम हेड कांस्टेबल या एएसआई लेवल के ऑफिसर्स करते थे। अगर कोई खास बात पता चलती थी तो फौरन बताई जाती थी और उस पर आगे की कार्यवाही होती थी, वरना जब एक कैसेट भर जाता था, तो उसे क्राइम ब्रांच के दफ्तर में जमा कर दिया जाता था. उसके बाद रिकॉर्डिंग ऑफिसर को एक नई कैसेट दे दी जाती थी।इसी बीच एक दिन मैं पुलिस हेडक्वॉर्टर की सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था कि एक एएसआई, जो एक एक्सटॉर्शन केस पर काम कर रहा था, मुझे ऊपर आते दिखा। उससे मैंने पूछा कि अरे, कुछ दिन पहले तुमको एक लाइन रिकॉर्ड करने के लिए दी थी, उसमें क्या निकला।

वह एएसआई बोला है कि जनाब, उसमें तो कोई धमकी की बात नहीं है, वह तो कुछ क्रिकेट जैसी बातें कर रहे थे कि यह कैच क्यों लिया, वह कैच क्यों छोड़ दिया, आउट क्यों नहीं हुए वगैरह। हमने कहाकि यह कैसे हो सकता है, जरूर ये कोई कोड वर्ड्स होंगे। उसने कहाकि वह कैसेट जमा करने जा रहा था, पहले आप सुन लें। कैसेट मैंने जेब में डाला और लंच के लिए घर चला आया। घर में मैंने वह कैसेट अपनी स्टडी टेबल पर रख दिया और सोचा कि आराम से रात में सुनूंगा। जब वापस शाम को घर पहुंचा, तो मेरे बच्चे कनिष्क और इवान ने मुझसे कहाकि आप यह हैंसी क्रोनिए का कैसेट क्यों लेकर आए हैं। मैंने कहाकि मैं हैंसी का कैसेट क्यों लाऊंगा, मैं तो आज एक एक्सटॉर्शन कॉल का कैसेट लाया था। 

फिर क्या था, बच्चों ने वही कैसेट फिर से लगा दिया, जिसमें एक आदमी टूटी-फूटी अंग्रेजी में बोल रहा था और दूसरा बहुत अच्छी अंग्रेजी में जवाब दे रहा था। हिंदुस्तानी आदमी से जो बात हो रही थी, वह कुछ इस तरह की थी कि जब तय हुआ था कि तुम लोग इतने ही रन बनाओगे, तो फिर ज्यादा क्यों बनाए या जो कैच लेना था, वो कैच क्यों नहीं लिया. उसमें से हाई क्लास अंग्रेजी बोलने वाला ये कह रहा था कि अगर तुम्हारे आदमी अपने दोनों हाथ मिलाकर कैच ले ही नहीं सकते हैं, तो मैं क्या करूं. कैसेट में इस तरह की बात सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ. इतना सुनने के बाद मैंने बच्चों से पूछा कि तुम लोगों को हैंसी क्रोनिए की आवाज कैसे पता है? इस पर बच्चों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही क्रोनिए कॉमेंट्री बॉक्स में बैठा इंटरव्यू दे रहा था, तो उसको हम लोगों ने सुना था और यह आवाज उसी की है.

अगले दिन क्राइम ब्रांच में इस पर विस्तार से समीक्षा हुई। ज्वॉइंट कमिश्नर क्राइम डॉ के. के. पॉल साहेब थे। उनकी राय पर, भारत और साउथ अफ्रीका के बीच वनडे क्रिकेट मैच हो रहे थे। उनका ठीक से पुनरीक्षण व विश्लेषण किया गया। हम सब इस राय के हुए कि यह है, तो पैसे लेकर मैच फिक्सिंग का मामला। लेकिन फिर किया क्या जाय। ऑफेंस (अपराध) क्या हुआ? इत्यादि-इत्यादि। हमने उस समय दिल्ली हाईकोर्ट के बहुत प्रतिष्ठित वकील दिनेश माथुर साहेब से अनौपचारिक रूप से बात की। उन्होंने कहा कि चीटिंग का मुकदमा तो बन सकता है, क्योंकि लोग इस उम्मीद से खेल देखते हैं कि खिलाड़ी ईमानदारी से खेल रहे हैं, लेकिन अगर पैसे लेकर नूरा-कुश्ती हो रही है, तो वह लोगों के साथ चीटिंग है। लेकिन इसे कोर्ट में साबित करना मुश्किल होगा। आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट के जज ने भी यही कहाकि यह मैच देखने वाले आम लोगों के साथ धोखाधड़ी है।

सवाल: हैंसी क्रोनिए और मैच फिक्सिंग को लेकर फिर दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने क्या किया?

प्रदीप श्रीवास्तव: हमने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह के मार्फत हैंसी क्रोनिए के खिलाफ, आम लोगों के साथ चीटिंग और धोखाधड़ी का मुकदमा 7 अप्रैल 2000 को दर्ज करा दिया। जैसे ही दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम के कैप्टन के खिलाफ एफआईआर की यह सूचना गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को दी गई। मीडिया में खबरें फैलीं। बस, आसमान फट पड़ा। डॉ पॉल और मैने एक छोटी सी प्रेस ब्रीफिंग जरूर की, लेकिन और सभी ने किनाराकशी कर ली। हैंसी क्रोनिए उस समय साउथ अफ्रीका में देवता की भांति पूजा जाता था और उस पर मैच फिक्सिंग का इतना बड़ा लांछन अकल्पनीय था। वहां के लोगों के गले के नीचे नहीं उतर रहा था.

फिर क्या था, साउथ अफ्रीका से जोरदार प्रोटेस्ट आया. हमारे अपने विदेश मंत्रालय ने उसे और बढ़ा-चढ़ाकर गृह मंत्रालय को भेज दिया। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि क्राइम ब्रांच की गैर जिम्मेदाराना और बचकानी हरकत से हमारे मित्र देशों से संबंध खराब हुए हैं। बिना पुख्ता सबूत के यह केस कैसे दर्ज किया गया। हालांकि हम लोगों ने इन अधिकारियों को बहुत समझाने की कोशिश की। यह भी बताया कि कि हमारे पास रिकॉर्डिंग है, जो वास्तविक घटनाओं से मेल खाती हैं। इत्यादि इत्यादि। लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था। रिकॉर्डिंग फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दी गई। इस तरह से तीन-चार दिन इसी पैनिक में बीते।

सवाल: आपको ये कैसे पता चला कि होम मिनिस्ट्री इस केस को लेकर या इसके खुलासे की टाइमिंग को लेकर आपसे क्यों नाराज था?

प्रदीप श्रीवास्तव: दिल्ली क्राइम ब्रांच में आने से पहले मैं कई जिलों में डीसीपी रह चुका था और तब बतौर डीसीपी क्राइम के मेरी मीडिया में भी बहुत जान पहचान थी। मैं अपने दफ्तर में बैठा था कि एक वरिष्ठ पत्रकार मेरे पास आए और उन्होंने बताया कि वो अभी गृह मंत्रालय से आ रहे हैं और वहां क्राइम ब्रांच के सीनियर अफसरों के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी गई है। डीसीपी यानी मुझे सस्पेंड करने की फाइल गृह मंत्री को भेजी जा रही है। इतना सुनने के बाद लगा कि अपने हाथ में तो कुछ था नहीं, भारी मन से घर चल दिया।

ये दौर सन 2000 का था। दिल्ली में लैंड लाइंस ही थीं, जिन्हें उठकर सुनने जाना पड़ता था।

मैंने फोन उठाया, तो उधर से कोई बोला कि डेप्युटी कमिश्नर आप तो बहुत खुश होंगे (Deputy Commissioner You Must Be A Very Happy Man).

मैने सोचा कि सस्पेंड होना तो कोई खुशी की बात नहीं है, लेकिन फिर भी मैने पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं और खुशी की क्या बात है। उसने कहा कि मैं पेरिस से रॉयटर का कॉरेस्पांडेंट बोल रहा हूं और क्या आप को मालूम नहीं कि आपने हैंसी पर जो जो भी आरोप लगाएं हैं, उसने कल रात चर्च में सब कबूल कर लिए हैं। हमें विश्वास नहीं हुआ, तो तुरंत टीवी खोला गया।

समाचार में तत्कालीन एनएसए ब्रजेश मिश्रा कह रहे थे कि सत्यमेव जयते। हमारे अफसरों ने जो कुछ भी मैच फिक्सिंग के बारे में कहा था, सब सच निकला। हमें उन पर गर्व है।

दुनिया बदल चुकी थी। सहानुभूति के फोन के बजाय बधाई संदेशों का तांता लग गया। शाम को ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर अजय राज शर्मा ने एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें तमाम विदेशी पत्रकार थे।

दुनिया का पहला मैच फिक्सिंग केस जो ये था। इससे पहले शक तो बहुतों पर किया गया था, लेकिन यह केस पहला ही था। साउथ अफ्रीका ने किंग कमीशन की स्थापना की, जिसमें क्रोनिए ने अपना अपराध स्वीकार किया। संजीव चावला जो, मेन बुकी था, वो उस समय लंदन में था। उसके प्रत्यार्पण की बहुत कोशिशें की गईं, लेकिन सफल नहीं हुई।

अंततोगत्वा वह 2020 में भारत लाया जा सका। हालांकि उससे पहले जून 2002 में क्रिकेट जगत का न भूल सकने वाला चरित्र यानी हैंसी क्रोनिए की एक प्लेन हादसे में मौत हो चुकी थी।

इस तरह से हैंसी क्रोनिए की कहानी किसी भी फिल्मी कहानी से बढ़कर थी, जिसमें ऐसे उतार-चढ़ाव आए, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। मेरे लंबे पुलिस जीवन का शायद यह सबसे महत्व पूर्ण केस था। जितना नाम मुझे इस केस में मिला वह अभूतपूर्व था। अद्भुत संयोग, ईश्वर की कृपा और विचित्र विरोधी परिस्थितियों का संगम इस केस को अविस्मरणीय बनाता है।

हैंसी का क्रिकेट करियर: हैंसी क्रोनिए एक शानदार और बेजोड़ क्रिकेटर थे. उन्होंने साउथ अफ्रीका के लिए 68 टेस्ट मैच खेले थे. सबसे खास बात ये थी कि इनमें से 53 मैचों में क्रोनिए ने कप्तानी की थी. उनकी कप्तानी में दक्षिण अफ्रीकी टीम ने 27 टेस्ट मैच जीते थे। जबकि 11 में दक्षिण अफ्रीका को शिकस्त मिली थी। वहीं 15 मैच बगैर हार-जीत के समाप्त हुए थे. वहीं हैंसी क्रोनिए ने 138 वनडे मैचों में दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी की और 98 में टीम को जीत दिलाई। क्रोनिए अंत बुरा हुआ। पहले उनके आजीवन खेलने पर बैन लगा। उसके बाद जून 2002 में विमान हादसे में मारे गए।

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